Monday, 2 November 2015

गूंगे बहरे व्यक्ति ने कबाड़ से बना दिया प्लेन.....

 : वह गूंगा-बहरा था, लोग मूर्ख कहते थे, बना दिया कबाड़ से प्‍लेन............

तिरुवनंतपुरम। बचपन से गूंगे-बहरे साजी थॉमस को इडुक्‍की के दूरस्‍थ गांव में लोग 'इडियट' कहते थे, मगर उसने अपनी मेहनत से ऐसा कारनामा कर दिया है, जिसने हर किसी को हैरत में डाल दिया है। 45 वर्षीय साजी ने कबाड़ और रीसाइकिल्‍ड चीजों से दो सीटों वाला अल्‍ट्रालाइट एयरक्राफ्ट बनाया है।

तिरुवनंतपुरम में रिटायर्ड विंग कमांडर एसकेजी नायर की निजी फ्लाइट ट्रेनिंग एकेडमी में साजी का X Air-S विमान कई सफल टेस्‍ट फ्लाइट्स पूरा कर चुका है। इस उपलब्‍िध के चलते साजी का नाम रिकॉर्ड बुक में भी शामिल किया गया है।

Discovery में ऋतिक सुनायेंगे साजी की कहानी...

साथ ही डिस्‍कवरी चैनल के HRX सुपरहीरोज नाम के कार्यक्रम में भी उनकी कहानी दिखाई जाएगी। इस कार्यक्रम की एंकरिंग रितिक रोशन करेंगे और इसमें नौ ऐसे लोगों की कहानी दिखाई जाएगी, जिन्‍होंने अपनी शारीरिक अक्षमता को पीछे छोड़कर अपने सपनों को पूरा किया है।

ऐसे चढ़ा जूनून.....
विमान बनाने का जुनून साजी के मन में 15 वर्ष की आयु में उस वक्‍त आया था, जब उन्‍होंने रबर के पेड़ों पर कीटाणुनाशक दवा के छिड़काव के लिए दो हेलिकॉप्टरों को उड़ते हुए देखा था। इसके बाद साजी ने हेलिकॉप्टर के पायलटों से दोस्‍ती कर ली।
इनमें से एक पायलट ने उन्‍हें अपना मुंबई का पता दे दिया। मात्र 15 साल की उम्र में वह घर छोड़कर पायलटों से मिलने मुंबई पहुंच गए। साजी के जुनून को देखकर पायलटों ने एविएशन से जुड़ी कुछ किताबें साजी को पढ़ने के लिए दीं।
अपने हिस्‍से की जमीन भी बेच दी

इसके बाद के वर्षों में साजी ने एयरक्राफ्ट बनाने के लिए खूब मेहनत की। उन्‍होंने अपने सपने को पूरा करने के लिए अपने हिस्‍से की जमीन भी बेच दी। उनकी पत्‍नी मारिया ने बताया कि पहले साजी ने एयरक्राफ्ट का फ्रेम बनाया। दूसरी बार में उन्‍होंने इसमें बाइक का इंजन लगाया, लेकिन यह उड़ान नहीं भर सका। दूसरे मॉडल को उन्‍होंने एक इंजीनियरिंग कॉलेज को बेच दिया।

इससे जो पैसा मिला उससे साजी ने एयरक्राफ्ट का इंजन खरीदा और अपना Saji X Air-S पिछले साल बनाकर तैयार किया। उनका नाम इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में ऐसे पहले व्‍यक्‍ित के रूप में शामिल किया गया है, जो डिफरेंटली एबल पर्सन हैं। वह रबर टैपर, इलेक्‍ट्रीशियन और शादी में फोटोग्राफी के जरिये अपनी जीविका चलाते थे।

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